यह मगध (वर्तमान बिहार) के प्राचीन साम्राज्य में एक प्रशंसित महाविहार (एक बड़ा बौद्ध मठ) था। वर्तमान में यह स्थल बिहार की राजधानी पटना के दक्षिण-पूर्व में स्थित बिहार शरीफ नगर के पास स्थित है। इस महान बौद्ध विश्वविद्यालय के भग्नावशेषों की खोज अलेक्जेण्डर कनिंघम द्वारा की गई थी। इस विश्विद्यालय की स्थापना का श्रेय गुप्त शासक, कुमारगुप्त प्रथम (450-470ई.) को प्राप्त है। इसे महान सम्राट हर्षवर्द्धन और पाल शासकों का संरक्षण भी प्राप्त हुआ था। यह विश्व का प्रथम पूर्णतः आवासीय विश्वविद्यालय था, जिसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इण्डोनेशिया, फारस और तुर्की से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थें। वर्ष 2016 में नालन्दा महाविहार भग्वाशेषों को युनेस्को द्वारा ’विश्व धरोहर’ के रूप में मान्यता दी गई।