Bring clarity in decision making

डिसीजन मेकिंग में स्पष्टता लाएं
निर्णय की प्रक्रिया को सुगम बनानो के लिउ लाएं इसमें स्पष्टता बिजनेस में डिसीजन लेने के अधिकार क्षेत्र के बारे में स्पष्टता लाकर आप बना सकते हैं टीम के भीतर कामकाज को सुगम। एक टीम के तौर पर काम करते हुए डिसीजन मेकिंग से आपका सामना कई स्तरों पर होता है। दुविधा तब होती है जब या तो टीम मेंबर अपनी मर्जी से कोई भी डिसीजन लेने लग जाते हैं, या फिर सारे ही डिसीजन्स के लिए आपकी स्वीकृति का इंतजार करते रहते हैं। इन स्थितियों से बचने के लिए डिसीजन मेकिंग में स्पष्टता लाएं। टीम मेंबर्स को पता होना चाहिए कि उनके अधिकर में कौनसे फैसले आते हैं और कौनसे नहीं।
माइनर डिसीजन
कुछ एक डिसीजन ऐसे होते हैं, जो आपके टीम मेंबर खुद ही ले सकते हैं। ये डिसीजन उनके अपने बैठने के स्थान को बदलने को लेकर हो सकते हैं, अपनी छुट्टी एडजस्ट कराने के हो सकते हैं, आम तौर पर ये माइनर डिसीजन हैं।
मीडियम डिसीजन
मीडियम डिसीजनन्स में फैसला आपकी नॉलेज में होता है। कंपनी के सामने बड़ा प्रोजेक्ट हो, तो कुछ माइनर डिसीजन भी मीडियम हो जाते हैं। तब कोई प्रोजेक्ट हेड अचानक छुट्टी लेने का फैसला अपनी मर्जी से नहीं कर सकता।
मेजर डिसीजन
किसी प्रोजेक्ट के लिए रणनीति तय करने या किसी पुरानी नीति में बदलाव करने जैसे डिसीजन आपके ही हाथ में होंगे। ये डिसीजन मेजर हैं। किस कंपनी के साथ आपने डील करना है, किसका साथ छोड़ना है, ये भी फैसले आप ही करेंगे। इसमें फालतू दखलअंदाजी बर्दाश्त न करें।


