Do not be in the office with discrimination

आपके साथ न हो ऑफिस में भेदभाव
ज्यादातर वर्कप्लेस पर भेदभाव किया जाता है, फिर चाहे यह लिंग, जाति या रंग को लेकर हो। जानते हैं कि कंपनियां किस तरह से ऐसी स्थितियों को दूर कर सकती हैं -
अवेयरनेस जरूरी है
संस्थानों को अपने एम्प्लॉइज को इस बारे में शिक्षित करना चाहिए किस तरह का व्यवहार स्वीकार किया जा सकता है और कैसा व्यवहार गलत हैं। कंपनी के टॉप मैनेजमेंट को इस तरह के कल्चर को विकसित करना चाहिए, जहां हर मुद्दे पर बात करने की छूट हो और पारदर्शिता मौजूदा हो कंपनियां चाहें तो अवेयरनेस कैंप्स का आयोजन कर सकती हैं और एम्प्लॉइज की मदद के लिए हेल्पलाइन्स शुरू कर सकती हैं।
डॉक्यूमेंटेशन करें
भेदभाव से एम्प्लॉइज को बचाने के लिए कंपनी को नीति निर्माण करना चाहिए। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि किस तरह से भेदभाव पर क्या एक्शन लिया जाएगा। अगर एम्प्लॉइज भेदभाव के बारे में रिपोर्ट करे तो उसे अपने निजी अधिकारों की सुरक्षा के बारे में निश्चिंत करना चाहिए। उसे भेदभाव के सबूतों का डॉक्यूमेंटेशन करने के लिए कहें।
मदद करें
संस्थानों को इस तरह की समितियों का गठन करना चाहिए, जो सिर्फ भेदभाव से जुड़े मामले देखे। इन समितियों को मुद्दे को हल करने की पावर देनी चाहिए। इनको कंपनी के एम्प्लॉइज को सशक्त बनाने के लिए काम करना चाहिए। इन्हें हर समस्या का तुरंत समाधान करने का प्रयास करना चाहिए।
खुद पर भरोसा रखें
ज्यादातर मामलों में प्रभावित एम्प्लॉई डिप्रेशन में चला जाता है और अपनी क्षमताओं पर शक करने लगता है। आपको अपनी ताकत पर पूरा यकीन करना चाहिए। हर तरह की बाधा के बावजूद अंदर से मोटिवेट रहना चाहिए। आपको अपने काम को बेहतर तरीके से पूरा करके दिखाना चाहिए।
फालोअप हो
जब किसी मुद्दे की रिपोर्ट कर दी जाए तो संस्थान को यह तय करना चाहिए कि उसका फॉलोअप हो और एम्प्लॉई को संतुष्ट किया जाए। आपको कंपनी के एम्प्लॉइज को अहसास करवाना चाहिए कि मैनेजमेंट उनकी परवाह करता है और कंपनी में उनकी वैल्यू है।


