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Do not panic from 'Criticism'

EEnvatX Team16 Oct 20261 min read
Do not panic from 'Criticism'

घबराने न लग जाएं 'क्रिटिसिज्म' से

आलोचनाओं को सुनकर एकदम घबराने के बजाय इन तीन बिंदुओं पर स्पष्टता लाएं, नया रास्ता नजर आ जाएंगा। हर किसी को कभी न कभी आलोचनाओं का सामना करना ही पडता है। इन आलोचनाओं को स्वस्थ तरीके से लिया जाए तो ये व्यक्ति का आत्मविश्वास तोडकर रख देती है। हां, यदि थोडे तर्कसंगत और सकारात्मक तरीके से देखा जाए तो आलोचनाएं आपको आपकी कमी दिखाती देती है,जिन्हें सुधारकर आप खुद को और बेहतर बना सकते है। हालांकि ऐसा करने के लिए तीन बिंदुओं की स्पष्टता होनी बहुत जरूरी है।

कौन है आलोचक

आलोचना सबसे आसान काम है। कोई भी किसी की भी आलोचना कर सकता है। इसलिए हर आलोचना पर डगमगाएं नही। जो आपके शुभचिंतक नहीं बल्कि टांग खि्ांचाई करने वाले हैं, तो उन्हें सीधे तौर पर नजरअंदाज करें।

क्या है आलोचना

कुछ आलोचना वास्तविक होती हैं और कुछ सिर्फ सामने वाले का नजरिया बयां करती है। जो आपकी आलोचना की गई है, उस पर विचार करें। यदि वह सच हैं तो क्या उससे आपका कोई नुकसान होता हैं? हां तो उसे सुधारने की दिशा में सोच सकते है।

कैसे करें सुधार

आलोचना लगती तो हमें डिगाने वाली है लेकिन थोडी सी सावधानी बरती जाए तो इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए भी किया जा सकता है। यदि वाकई आलोचना सच्ची हैं, तो उसे दिल से लगाकर बैठने के बजाय इस बात पर ध्यान दें कि खामी को दूर कैसे ंकिया जा सकता है और खुद में सुधार कैसे लाया जा सकता है।