Entrance Exams For Pharmacy After 12th (12 वीं के बाद फार्मेसी के लिए प्रवेश परीक्षा)

Entrance Exams For Pharmacy After 12th
(12 वीं के बाद फार्मेसी के लिए प्रवेश परीक्षा)
स्वरोजगार का बेहतर विकल्प :-
फर्मासिस्ट बनकर दवाओं की ब्रिकी करने के पेशे को स्वरोजगार का बेहतर विकल्प माना जा सकता हैं।
जरूरी योग्यता :-
फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स या बायोलॉजी विषयों के साथ ग्यारहवीं और बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद डीफॉर्म (डिप्लोमा इन फार्मेसी) पाठ्यक्रम में दाखिला लिया जा सकता है। फार्मेसी के डिप्लोमा या बैचलर डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश बारहवीं में प्राप्त अंकों या प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है। दो वर्षीय डिप्लोमा हासिल करने के बाद आपके पास दवा की दुकान खोलने का विकल्प तो होता ही है, आगे पढ़ाई जारी रखने का भी विकल्प बाकी रहता हैं। डीफार्म के आधार पर लेटरल एंट्री योजना के तहत बीफार्म पाठ्यक्रम के दूसरे साल में सीधे प्रवेश भी मिलता है।
उपलब्ध पाठ्यक्रम :-
डिप्लोमा इन फार्मेसी (डीफॉर्म), बैचलर ऑफ फार्मेसी (बीफॉर्म), बीएससी फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी, मास्टर ऑफ फार्मेसी (एमफॉर्म), एमएससी (फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री)
रोजगार के अन्य विकल्प :-
राज्य या केंद्र सरकार के अस्पतालों, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभागों और सार्वजनिक दवा उत्पादन कंपनियों में फार्मासिस्ट की नियुक्ति होती है। इसी तरह औषधियों के गुणवता के नियंत्रण और उनकी जांच के लिए नियुक्त होने वाले ड्रग इंस्पेक्टर या सरकारी विश्लेषकों के चयन के लिए भी फार्मेसी के जानकारों को चुना जाता है।
निजी क्षेत्र :-
दवा निर्माण और दवाओं के वितरण कार्य में लगी कंपनियां ब्रिकी व प्रचार कार्यों के लिए मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) की बडे़ पैमाने पर नियुक्तियां करती हैं।
अनुसंधान क्षेत्र :-
सरकारी संगठनों और निजी कंपनियां नई दवाओं की खोज व पुरानी दवाओं की क्षमता वृद्वि के लिए लगातार अनुसंधान करते रहते हैं।


