Government Jobs For Environmental Engineers (पर्यावरण इंजीनियरों के लिए सरकारी नौकरियां)

Government Jobs For Environmental Engineers
पर्यावरण के संकटमोचक :-
पर्यावरणविद चेतावनी देते हैं कि पानी अगले विश्व युद्ध का कारण बन सकता है। अब इसमें पानी के उपयोग के बदलते तरीके, अमेरिका जैसे बड़े देशों द्वारा पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसी बाधाओं को जोड़ दें तो स्थिति और भयावह हो जाती है। अच्छे पर्यावरणविद जो इसके संरक्षण की आवाज बन सकें, की आज हर जगह जरूरत है- सरकार को भी उनकी जरूरत है, निजी कॉरपोरेशनों को भी और समुदायों को भी। एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की वह ब्रांच है जिसका सरोकार जल, वायु और पृथ्वी के संसाधनों के संरक्षण के जरिये पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने से जुड़ा है। यदि आप पर्यावरण के अध्ययन में दिलचस्पी रखते हैं और 21 वीं सदी की पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के लिए नए विचार और तकनीकी समाधान पेश कर सकते है तो एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग आपके लिए सही कॅरियर होगा।
भूमिका :-
पर्यावरण इंजीनियर नवीकरणीस ऊर्जा, प्रकृति के संरक्षण, पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी का दायित्व संभालते हैं। वे रिसर्च के जरिये ऐसी तकनीक विकसित करते हैं जो पर्यावरण पर हर चीज के नाकारात्मक असर को कम कर सके और अम्ल वर्षा, ग्लोबल वार्मिग, वाहन उत्सर्जन तथा ओजोन ने जुड़े मुद्दों पर नियंत्रण रख सके। पर्यावरण इंजीनियर को रिसर्च सेंटरों, एनजीओ, फूड प्रोसेसिंग और टेक्नोलॉजी, वन विभाग और हरियाली बढ़ाने में लगे सरकारी विभागों में जॉब मिल सकती है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लगे पर्यावरण इंजीनियरों का वेनत 25,000 से 35,000 रु. तक हाक सकता है। ऊंची डिग्री रखने वालों का वेतन 35,000 रु. से 50,000 रु. तक हो सकता है। एनवायर्नमेंट इंजीनियर में रिसर्च भी अच्छा वेतन दिलाने वाली साबित हो सकती है- जो 50,000 से 75,000 रु. तक हो सकती है।
योग्यता :-
यदि आपने पीसीएम के साथ 10$2 किया है तो आप 4 वर्षीय बीटेक डिग्री कोर्स इन एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुछ संस्थान आप से फिजिक्स और मैथ के साथ बायोटेक्नोलॉजी/कंप्यूटर सांइस/बायोलॉजी की भी अपेक्षा रखते हैं। आपको अधिकतर संस्थानों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी। आईआईटी खड़गपुर सिविल इंजीनियरिंग/एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग ऐंड मैनेजमेंट में पांच साल की डुअल डिग्री देता है। आईआईटी मद्रास भी सिविल इंजीनियरिंग/एनवायर्नमेंट इंजीनियरिंग में 5 साल की डुअल डिग्री देता है। इन प्रोग्रामों में दाखिले के लिए आपको जेईई (एडवांस्ड) पास करनी होगी। तो अगली पीढी को स्वच्छ पर्यावरण देने की मुहिम में शामिल होइए।
क्या पढ़ेगे कोर्स में :-
अंडरग्रैजुएट प्रोग्राम आपको टेक्नोलॉजी की शिक्षा देकर इस क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए ग्रूम करता है और प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम प्रयोग के लिए नये समाधान तलाशने की अपेक्षा करता है। उदाहरण के तौर पर आपको जल को शुद्ध कर उसका वितरण सिखाया जाएगा और इस्तेमाल किए गए पानी का संशोधन और प्रबंधन सिखाया जाएगा। कोर्स में हर तरह की वायु, शोर, जल प्रदूषण और मल तथा घातक कचरे का प्रबंधन सिखाया जाएगा। प्रोजेक्ट प्लानिंग और क्रियान्वयन कॅरिकुलम का अभिन्न हिस्सा होते हैं। पर्यावरण नियंत्रण और मानकों को लागू करना भी इसका हिस्सा होते हैं।
ग्रैजुएशन के बाद क्या :-
पर्यावरण इंजीनियर निजी और सरकारी संस्थानों, कॉरपोरेशनों और एनजीओ में काम तलाश सकते हैं। वे डिजाइनर, प्रदूषण नियंत्रक अधिकारी, योजनाकार और संचालक का काम तलाश सकते है। ग्रैजुएट रिसर्च मं जा सकते हैं, इसके लिए फेलोशिप भी मिलती है। अधिकतर आईआईटी अपने स्पेशलाइज्ड सेंटरों में उच्च डिग्री (एमटेक-पीएचडी) कोर्स भी करवाते हैं। टीईआरआई एनवायर्नमेंटल इंजीनियरों को अपने विभिन्न इंडस्ट्रियल प्रोजेक्टों के लिए रिक्रूट करता है। कुछ अन्य अग्रणी नियोक्ताओं में यूपीएल एनवायर्नमेंटल इंजीनियर्स लिमिटेड, बीजीआर एनर्जी सिस्टम्स आदि के नाम शामिल हैं। इन प्रोफेशनलों की मांग स्वास्थ्य विभागख् स्थानीय इंजीनियरिंग और सार्वजनिक निर्माण विभाग में पड़ती है। निजी क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी, निर्माण मे लगी कंपनियां, जल और मल निकासी में लगी संस्थाएं तथा मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग भी ऐसे इंजीनियरों को रिक्रूट करती हैं।
एक नजर में :-
कॅरियर विकल्पः एनवायर्नमेंटल इंजीनियर, साइट इंजीनियर, बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर प्रोग्रामः बीटेक अवधिः 4 साल योग्यताः पीसीएम के साथ 10$2 जॉब एरियाः बायो-रिजर्व कंजर्वेशन, वेस्ट वाटर मैनेजमेंट, आपदा प्रबंधन, लेबोरेट्रीज, यूनिवर्सिटी, कॉलेज, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा।


