GST: Gift, theft, lost things will also have to be accounted for.

जीएसटी : गिफ्ट, चोरी, नष्ट हुई चीजों का भी रखना पड़ेगा हिसाब
मैन्यूफैक्चरिंग, ट्रेडिंग और सर्विसेज तीनों बिजनेस का हिस्सा है तो सबके लिए अलग रिकॉर्ड चाहिए,
खातों में सीरियल नंबर से करनी होगी एंट्री, मिटाया या ओवरराइट नहीं किया जा सकेगा।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में रिकॉर्ड रखना कारोबारियों के लिए बड़ा सिरदर्द हो सकता है। उन्हें मुफ्त सैंपल और गिफ्ट के साथ-साथ चोरी, गुम या नष्ट हुई चीजों का भी हिसाब-किताब रखना पड़ेगा। खातों में एंट्री सीरियल नंबर के साथ करनी पड़ेगी। बाद में उसे मिटाया या ओवरराइट नहीं किया जा सकेगा। अगर कोई गलत एंट्री हो गई तो उसे रेखांकित कर सत्यापित (अटेस्ट) करना पड़ेगा। उसके बाद नई एंट्री लिखनी पड़ेगी। सेंट्रल एक्साइज एवं कस्टम बोर्ड (सीबीईसी) ने रिकॉर्ड मेनटेन करने से संबंधित जो ड्राफ्ट नियम जारी किए है; उनके मुताबिक कारोबारी को हर गतिविधि के लिए अलग अकांउट या रिकार्ड रखना पड़ेगा। मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग और सर्विसेज- सबके लिए अलग।
जितनी चीजें रिसीव या सप्लाई की, सबका हिसाब होगा
कारोबारी जितनी भी चीजें रिसीव या उनकी सप्लाई करेगा, हर एक के स्टॉक का हिसाब रखना होगा। खाते में ओपनिंग बैलेंस (पिछला बकाया) भी बताना पड़ेगा। अगर कोई वस्तु खो गई, चोरी या नष्ट हो गई तो उसका भी जिक्र होगा। इसी तरह अगर वह कोई चीज किसी को गिफ्ट या फ्री सैंपल के तौर पर देता है तो वह भी बताना होगा।
स्क्रैप औ वेस्टेज की भी जानकारी देनी पड़ेगी
मैन्युफैक्चरर को कच्चे माल, तैयार माल और स्क्रैप के साथ वेस्टेज की जानकारी भी देनी होगी। यह मासिक आधार पर होगा। सर्विसेज कंपनी को हर सेवा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं का हिसाब रखना पड़ेगा। बताना होगा कि उस वस्तु की कितनी मात्रा लगी। कंपनी किसी और की सर्विस का इस्तेमाल करती है तो उसका उल्लेख करना पड़ेगा। जिसे सर्विस दे रही है उसका रिकॉर्ड भी होगा।
हर काम के लिए अलग रजिस्टर
एडवांस पाने, भुगतान करने और एडजस्टमेंट के लिए अलग अकाउंट होगा। इसी तरह कितना टैक्स बनता है, कितना संग्रह किया और कितना चुकाया इसका अलग हिसाब रखना होगा। कितना इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया, इसका रिकॉर्ड भी होना चाहिए। एक अलग अकाउंट टैक्स इनवॉयस, क्रेडिट और डेबिट नोट, डिलीवरी चालान का होगा।


