Take the under performers too

अंडर परफॉर्मर्स को भी संभालें
ज्यादातर कंपनियां इस बात पर जोर देती हैं कि कैसे टैलेंट को अपने साथ जोड़े रखा जाए। इसके साथ ही कंपनियों को अंडर परफॉर्मर्स के साथ भी सही तरह से डील करने की कोशिश करनी चाहिए, तभी वे अपनी स्थिति में सुधार कर सकते हैं और एम्प्लॉई को सफल बना सकते हैं -
स्ंवाद करें
आपको बेस्ट आउटपुट न देने वाले एम्प्लॉइज के साथ नियमित मीटिंग करनी चाहिए और उन्हें बताना चाहिए इससे कंपनी पर क्या असर पड़ रहा है। उन्हें बताना चाहिए कि किस तरह से वे बेहतर प्रदर्शन के लिए सही प्रयास कर सकते हैं।
समस्या समझें
कम्युनिकेशन से समझ में आता है कि समस्या क्या है और वह क्यों पैदा हुई है। जब आपको कारण के बारे में पता होता है, तो आप उसे दूर करने के लिए प्रयास कर सकते हैं। इसके लिए काउंसलिंग और कोचिंग की मदद ले सकते हैं। कई बार एम्प्लॉई भी आपको बताते हैं। कि वे अच्छा परफॉर्म क्यों नहीं कर पा रहे हैं। उनकी परेशानियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
ताकत पहचानें
कंपनी को हर एम्प्लॉई को उसकी ताकत को पहचानने का अवसर देना चाहिए। इससे एम्प्लॉई तय कर पाता है कि उसे क्या काम करना है और क्या नहीं करना है। कई बार इंसान मनचाही जगह पर काम न करने के कारण भी परफॉर्स नहीं कर पाता है। इसलिए उसे मनपसंद काम का मौका भी मिलना चाहिए।
लेबल से बचें
कई कंपनियां पारंपरिक रेटिंग सिस्टम के बजाय लक्ष्य हासिल करने पर फोकस करती है। अगर एम्प्लॉई खुद अपना लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने के लिए प्रयास करे तो उसे महसूस होता है कि कमी कहां रही और कहां फायदा हुआ। इससे एम्प्लॉई कमी को दूर करने की कोशिश करता है।
रोडमैप तैयार करें
समय बचाने और वार्तालाप को आसान बनाने के लिए समस्या की पहचान होते हुए समाधान की दिशा में काम शुरू कर देना चाहिए। किसी को बेहतर परफॉर्म करने के लिए पूरे संसाधन और मौके मिलें तो अच्छे परिणाम मिलते हैं। बतौर टीम लीडर आपको एम्प्लॉइज के लिए रोडमैप तैयार करना चाहिए।


