Team ready to learn

सीखने को तैयार रहे टीम
हर अच्छी कंपनी अपने एम्प्लॉइज को नई.नई चीजें सीखने के लिए प्रोत्साहित करती है। इससे काम के दौरान पैदा होने वाली समस्याएं खत्म हो जाती है। जानते है कि वर्कप्लेस पर प्रभावी लर्निग प्रासेस किस तरह से लागू की जा सकती है।
सीनियर-जूनियर नहीं।
सीखने की कोई उम्र नहीं होती। कंपनी में हर व्यक्ति को नई चीजें सीखनी चाहिए। सीनियर्स को भी नए जमाने के अनुरूप नई चीजें सीखने की कोशिश करनी चाहिए। जिस कंपनी में सीनियर दृ जूनियर के बजाय काम को ज्यादा महत्व दिया जाता है, वहां पर सुझाव ,सुधार और सीखने की प्रक्रिया चलती रहती है और हर एम्प्लॉई को विकास का मौका मिलता है।
बॉडिंग जरूरी है
जिन संस्थानों में एम्प्लॉइज लंच टाइम में मिलकर भोजन करते है, वहां पर एम्प्लॉइज के नई चीजें सीखनें की काफी सभावना रहती ह। भोजन के दौरान एम्प्लॉइज अपनी मन की बातों को खुलकर सबके सामने रखता है। ऐसे में समाधान मिलने में देर नहीं लगती।
विविधता पर ध्यान
अगर आपकी टीम में विविधता होगी , तो वहां पर सीखने की प्रक्रिया भी चलती रहेगी। लर्निंग ईको.सिस्टम के लिए जरूरी है कि एम्लॉइज को निर्णय लेने की आजादी दी जाए। इससे वे खुद गलतियां करके सीख सकते है। अलग.अलग तरह कके एम्प्लॉइज के मिलाकर बडा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए टीम बनाई जा सकती है।
प्रभावी संवाद का फायदा
कंपनी में किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले आपको जरूरी जानकारियां सबके साथ शेयर करनी चाहिए। कपंनी को टू.वे कम्यूनिकेशन की इजाजत देनी चाहिए। एम्प्लॉइज की
ओर से मिले फीडबैक पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे उनमें कंपनी के प्रति अपनापन पैदा होता है।
फ्लेक्सिबल रहें
आपको टीम के साथ फ्लेक्स्बिल रहना चाहिए। आप उन्हें वर्क फ्रॉम होम ,फ्लेक्सी टाइंमिंग और ब्रिंग योर ऑन डिवाइस जैसी सुविधाएं दे सकतें है। इससे एम्प्लॉइज के मन में काम को लेकर संतुष्टि पैदा होता है। आजादी और क्रिएटिविटी साथ साथ चलते है। इसलिए नई चीजें सीखनें के लिए एम्प्लॉइज को आजादी भी देनी चाहिए।


