The region of failure is comparison

विफलता का रीजन है कंपेरिजन
सफलता पाने के लिए जरूरी है कि हर समय कंपेरिजन करना छोड़ दें। अपनी रुचियों पर गौर किए बिना दूसरों से तुलना करने वाले लोग अपनी क्षमताओं के साथ न्याय नहीं कर पाते। प्रोफेशनल जीवन में दूसरों से तुलना करके उनके जैसा बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा लेने के लिए कहा जाता है। यह अप्रोच कुछ हद तक सही है लेकिन यदि आप हर चीज में कंपेरिजन करते रहते हैं तो आप अपने अंदर मौजूद असल योग्यता को भूल ही जाते हैं और सिर्फ उसी दिशा में चलने लग जाते हैं, जिसमें सामने वाला व्यक्ति ऊंचाइयां छू रहा होता है। नतीजा यह होता है कि आप न तो ऊंचाई छू पाते हैं, न ही जमीन पर ही टिके रह पाते हैं। इसलिए संतुलन सीखें।
समझें स्थिति
अक्सर हम इतने अधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले से अपनी तुलना करने बैठ जाते हैं कि मन में निराशा बैठना स्वाभाविक ही हो जाता है। इसलिए तुलना से पहले सामने वाले व्यक्ति की रुचि, स्थिति, प्रशिक्षण और अनुभव आदि को भी ध्यान में रखें।
खुद को जानें
अगर प्रेरणा लेने के लिए भी तुलना करना चाहते हैं तो भी सबसे पहले अपने आप को जानें। यह जानें... आपको क्या करना पसंद है.... आप किसी काम को कैसे अच्छा करते हैं...। इनके जवाब ढूंढें।
न धकेलें खुद को
किसी भी फील्ड में खुद को सिर्फ इसलिए मत धकेल दें कि वह आजकल ट्रेंड में है। या जो काम आपको अच्छा आता है, वह अच्छा नहीं माना जाता। अपनी पसंद का काम करें। ऐसा करने पर विश्वास बढ़ेगा और आप हमेशा आगे जाएंगे।


